SGN Khalsa Law College
Welcome to

SGN Khalsa Law PG College

Education is both the act of teaching knowledge to others and the act of receiving knowledge from someone else.

Have questions? Get Free Guide

‘विद्या विचारी ताँ पर उपकारी” श्री गुरु ग्रन्थ साहब जी की यह वाणी विद्या के महत्व को प्रमाणित करती है। विद्या उस दीपक के समान है, जो स्वयं तो प्रकाश देता ही है. बिना किसी भेद के दूसरों को भी प्रकाशित कर अखिल विश्व को आलेकित करने की क्षमता रखता है, उस पुष्प के समान है जो खिलकर किसी भी बगिया की शोभा बढ़ाए किन्तु उसकी सुगन्ध पर किसी का आधिपत्य नहीं होता, हवा के झोंको के साथ बहकर हर साँस को सुवासित करती है, हर घर में सुगन्ध बिखेरती हुई आगे बढती जाती है। विद्या के बिना न तो मनुष्य अपनी क्षमता को पहचान सकता है और ना ही उसका सदुपयोग कर सकता है।

निश्चय ही, इस तथ्य को जानते हये ही शिक्षा से अभावग्रस्त श्रीगंगानगर के ग्रामीण आंचल के लोगों का शिक्षा से परिचय कराने के अपने स्वप्न को साकार कर, हर दिल में ज्ञान की अलख जगाने का उददेश्य ले. श्रीगंगानगर के समाज के कुछ अग्रणी महानुभावों ने सम्पूर्ण समाज के सहयोग से जो अनवरत रूप से अब तक भी जारी है, सभी को शिक्षा देने के भाव से दूरगामी योजना के अन्तर्गत 1939 में श्री गुरू नानक खालसा स्कूल के रूप में शिक्षा के ऐसे पौधे को रोपा जो कि कालान्तर में क्रमशः हाईस्कूल, हायर सैकेण्डरी स्कूल, स्नातक महाविद्यालय के रूप में स्थापित हो मैडिकल, नॉन मैडिकल, आर्ट्स, कामर्स आदि विभागों को स्थापित कर उन्नति करता हुआ, जीव विज्ञान, वनस्पति, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायनशास्त्र, कम्प्यूटर में स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रूप में विकसित हो 2004 में U.G.C. की संस्था NAAC द्वारा B+ ग्रेड प्राप्त कर देश के चन्द अग्रणी महाविद्यालयों में सम्मिलित हो उन्नति के शीर्ष पर जा पहुंचा है। इसी महाविद्यालय के एक विभाग के रूप में इस क्षेत्र के लोगों में विधिक चेतना फैलाने एवं विधिक व्यवसाय की शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 1974 में विधि विभाग की स्थापना की गई थी, जिसने 2004 में प्रोन्नत होकर एस. जी. एन. खालसा विधि महाविद्यालय के रूप में बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर, कालेज शिक्षा विभाग, जयपुर, बार कौंसिल ऑफ इण्डिया, नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त कर अपनी पृथक् पहचान बनाई। 2005 में महाविद्यालय में लेबर लॉ एवं क्रिमिनोलॉजी में डिप्लोमा कक्षाएं तथा 2007 में विधिक शिक्षा की सर्वोच्च शिक्षा एलएल एम. भी प्रारम्भ होने के बाद महाविद्यालय को स्नातक से स्नातकोत्तर विधि महाविद्यालय होने का गौरव उपलब्ध हुआ।

‘सत्य सबसे ऊँचा है – सत्य से भी ऊँचा है सत्य का आचरण” श्री गुरू नानक देव जी की वाणी के इन पवित्र शब्दों से प्रेरित हो, सत्य की पताका उठाते हुये खालसा शिक्षण संस्थान की सभी संस्थाएँ व उनके विभाग अपने अनुशासन, शिक्षा की गुणवत्ता एवं अन्य गतिविधियों के कारण सम्पूर्ण राजस्थान में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। इन संस्थाओं के छात्रो ने न केवल खेलकूद में राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित कर संस्था का गौरव बढ़ाया है अपितु शैक्षणिक क्षेत्र में भी राज्य एवं राष्ट्र की उच्च प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त की है। यहां छात्रों को नैतिक और धार्मिक शिक्षा प्रदान करने हेतु 1979 में धर्म अध्ययन विभाग की भी स्थापना की गई। इस विभाग में महाविद्यालय के अतिरिक्त नगर और जिले में कुछ ऐसे उत्सव करवाये जिन्होंने संस्था की पहचान को धर्म के क्षेत्र में भी महत्व प्रदान किया। इस महाविद्यालय में सह शिक्षा की व्यवस्था है। इस महाविद्यालय में धर्म निरपेक्षता, समता, भाईचारा, प्रजातंत्र, मानवगरिमा, देश की अखण्डता व एकता के विचारों से ओतप्रोत शिक्षा प्रदान कर छात्रों के पूर्ण व्यक्तित्व बनाने पर विशेष बल दिया जाता है।

संस्था परिसर हिन्दूमल कोट रोड पर विशाल भू भाग पर स्थित है। परिसर हरे भरे पेड पौधों से आच्छादित है जो अध्ययन व मनन के लिए शान्त व सुरम्य वातावरण प्रदान करता है। इस संस्था में 8 विशाल हवादार व्याख्यान कक्ष हैं जिसमें एक कक्ष मूट कोर्ट करवाने हेतु भी हैं। पुस्तकालय, वाचनालय भवन, जलपान गृह, एन.एस. एस. एवम् कम्प्यूटरीकृत कार्यालय है। आधुनिक विधि पुस्तकें, जरनल्स, पत्र पत्रिकाएँ सन्दर्भ ग्रंथों उच्चतम अदालतों के निर्णयों आदि सहित लगभग 15,000 पुस्तको का विशाल पुस्तकालय एवं वाचनालय है। छात्राओं हेतु छात्रा भवन की व्यवस्था है एवं छात्रों को अध्यापन एवं दिग्दर्शन हेतु सुयोग्य एवं निष्ठावान प्रवक्ता है।

वस्तुतः महाविद्यालय निश्चय ही समाज की आशाओं प्रत्याशाओं पर खरा उतरा है। सभी वर्गो का विश्वास अर्जित करने एवं शिक्षा के प्रति जागरूक महानुभावों का समय-समय पर आशीर्वाद स्नेह एवं प्रेरणा प्राप्त करने में सफल हुआ है. जिसका श्रेय इस महाविद्यालय के कर्मठ एवं अनुभवी अध्यापकों समय-समय पर कार्यरत प्रबन्ध समितियों एवं संस्था के कर्मचारियों को जाता है।